हमारे संस्थापक

जनक नायर

सही मायनों में सम्पर्क फाउंडेशन की संस्थापक स्वर्गीय श्रीमती जनक नायर (1936-2017) थीं | ये उनका  ही सपना और पवित्र विचार था जिसकी बदौलत सम्पर्क फाउंडेशन का जन्म हुआ| उन्होंने अपनी संस्था का नाम "सम्पर्क" भी ऐसा ही चुना जो इसके आदर्शों को परिलक्षित करे | 'सम्पर्क' यानी जुड़ना - जुड़ना समाज के वंचित और हाशिए पर रह रहे लोगों से और फिर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना | यही सम्पर्क का आदर्श और लक्ष्य है |

श्रीमती जनक एक सफल शिक्षिका थीं जिन्होंने 35 वर्ष के अपने अध्यापन कार्य के दौरान अपने  स्कूल  का नेतृत्व भी बहुत कुशलतापूर्वक किया था | उनका मानना था कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हों और मन आकाँक्षाओं से परिपूर्ण हो तो एक बच्चा दुनिया को अपनी मुट्ठी में कर सकता है | यह उन्ही की प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव था कि अनुपमा और विनीत ने अपने अपने सफल करियर को बीच में ही छोड़कर अपना जीवन समाज के वंचित तबके के लोगों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया | 

वे आज भी सम्पर्क के स्पार्क्स का प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं | स्पार्क्स जो उनसे प्रेरित होकर अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करने से कभी पीछे नहीं हटते और देश के दूर दराज के हिस्सों में जाकर ,लाखों वंचित बच्चों के जीवन में बदलाव लाने के लिए दिन रात एक करने में लगे रहते हैं |

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विनीत नायर

विनीत नायर, सम्पर्क फाउंडेशन के संस्थापक ,बहुआयामी व्यक्तित्व के मालिक हैं | एच. सी. एल. के पूर्व सी. ई. ओ., प्रबंधन की दुनिया के एक जानी मानी शख्शियत होने के साथ ही उनकी पहचान बहुप्रशंसित पुस्तक 'एम्प्लॉयी फर्स्ट ,कस्टमर सेकंड ' के लेखक रूप में भी है | वे परपरागत रूढ़ियों और नियमों में आवश्यकतानुसार फेरबदल करके उन्हें नए सिरे से आजमाते रहने में यकीन करते हैं | 

उनका मानना है कि प्रचलित तरीकों में आमूल चूल परिवर्तन लानेवाली तकनीक ही उन बाधाओं को दूर कर सकती है जो बड़े पैमाने पर सामाजिक बदलाव नहीं लाने देतीं | 

फोर्ब्स पत्रिका ने भी अपनी 'हीरोज ऑफ़ फिलांथ्रॉपी लिस्ट 2016' उन्हें 'नवाचार आधारित व्यापक सामाजिक परिवर्तन' के  प्रणेता के रूप में चिन्हित किया | यही नहीं फॉरेन पॉलिसी नामक  पत्रिका ने बच्चों के सिखने के लिए तकनीक के क्षेत्र में किये गए इनके नवाचारी प्रयोगों के लिए इन्हे 'ग्लोबल थिंकर 2016' के ख़िताब से नवाज़ा |  

प्रबंधन की दुनिया में एक अभूतपूर्व मिसाल कायम करते हुए उन्होंने एच. सी. एल. को 85,000 कर्मचारियों वाली, 4.7 बिलियन $ के उपक्रम के रूप में सफलता की नई बुलंदियों तक पँहुचा  दिया | इस उपलब्धि को स्वीकार करते हुए फार्च्यून पत्रिका ने इसे 'दुनिया के सबसे आधुनिक प्रबंधन' की मान्यता दी और विनीत को अपने 2012 के 'ग्लोबल एग्जीक्यूटिव ड्रीम टीम' में शामिल किया|

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अनुपमा नायर

अनुपमा नायर सम्पर्क फाउंडेशन की सह संस्थापक हैं | पेशे से स्पेशल एडुकेटर , संपर्क के  शैक्षणिक कार्यों का संचालन वही करती हैं | शिक्षा के क्षेत्र में दूरदर्शी और नवाचारी विचारक के रूप में  उनकी एक अलग पहचान है| सम्पर्क के स्वरुप में बदलाव लाने का श्रेय इन्हे ही जाता है |  बच्चों के सीखने के स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए किफायती नवाचारों को विकसित करने में इनकी अहम् भूमिका रही है| एक ग्रांट देने वाली संस्था से सामाजिक बदलाव लाने में अग्रणी भूमिका निभाने वाली सम्पर्क फाउंडेशन की पहचान इन्ही के अथक प्रयासों का नतीजा है| 

वर्षों के शोध के बाद इन्होने तकनीक आधारित एक ऐसी शिक्षण कला का विकास किया जिसने शिक्षकों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई| इसकी बदौलत 6 राज्यों के 76,000 सरकारी स्कूलों में कक्षा प्रक्रिया का स्वरुप ही बदल गया है और बच्चे 'खेल खेल में सीखने ' की पद्धति का अनुभव कर पा रहे हैं| 

फॉरेन पॉलिसी पत्रिका के ग्लोबल थिंकर्स लिस्ट में विनीत के साथ इनका भी नाम शामिल है | फोर्ब्स के 48 'हीरोज़ ऑफ़ फिलांथ्रॉपी ' लिस्ट में भी इनका नाम दर्ज है | फार्च्यून पत्रिका ने इन्हे 'शिक्षण कला के क्षेत्र में नवाचार ' के लिए इन्हे अपनी लिस्ट में शामिल किया | इनके द्वारा लाये गए शैक्षणिक नवाचार हार्वर्ड केस स्टडी के रूप में पढ़ाये जाते हैं|

 

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