30 July, 2019

अब "सम्पर्क" से और स्मार्ट होंगी हिमाचल की पाठशालाएँ

TMNEWSHUB By TMNEWSHUB

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां समग्र शिक्षा अभियान के अन्तर्गत सम्पर्क स्मार्टशाला कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। यह कार्यक्रम गणित और अंग्रेजी विषयों में प्रदेश के सभी प्राथमिक स्कूलों में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान की जाए और उनमें सीखने की क्षमता भी बढ़ाई जाए ताकि वे प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए स्वयं को तैयार कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना का प्रमुख उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और छात्रों में सीखने के क्षमता को बढ़ाना है ताकि स्कूली शिक्षा को सभी स्तरों पर समावेशी बनाया जा सके। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि यह स्मार्ट-किट निश्चित रूप से राज्य के लाखों छात्रों के लिए वरदान सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्पर्क स्मार्टशाला अंग्रेजी और गणित विषयों में सीखने में आने वाली बाधाओं को दूर करने व पाठशालाओं में लर्निंग आउटकम को बेहतर बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी। इस कार्यक्रम से शिक्षकों को भी सहायता मिलेगी। जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य के साथ-साथ देश में शिक्षा के क्षेत्र में भारी परिवर्तन आया है। राज्य सरकार ने शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधारों के साथ शिक्षा के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया है। सरकार अब नए संस्थानों को खोलने के बजाय मौजूदा संस्थानों को मजबूत करने पर अधिक जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने सम्पर्क फाउंडेशन द्वारा इस परियोजना के लिए 25 करोड़ रुपये का योगदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हालांकि हिमाचल प्रदेश एक छोटा राज्य है, लेकिन इसने विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में, यह प्रदेश देश का अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि नई तकनीक का उपयोग न केवल सार्वजनिक सेवाओं के त्वरित निष्पादन में सहायक है, बल्कि विभिन्न चालू परियोजनाओं की निगरानी में भी लाभदायक है। शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किए गए दो नए ऐप शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने में मददगार साबित होंगे। उन्होंने कहा कि सीवी रमन वरच्युल क्लास रूम को राज्य में शुरू किया जाएगा, जिससे प्रौद्योगिकी के माध्यम से छात्रों को शिक्षण की बेहतर सुविधाएं प्रदान होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गरीब परिवारों के 500 मेधावी छात्रों को कोचिंग की सुविधा प्रदान करने के लिए मेधा प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परिक्षाओं में तैयारी के लिए एक लाख रुपये प्रति विद्यार्थी सहायता प्रदान की जा रही है। 

मुख्यमंत्री ने स्कूलों में शिक्षा प्रणाली की निगरानी करने के लक्ष्य से ‘शिक्षा साथ मोबाईल ऐप’ का भी शुभारम्भ किया। यह ऐप ऑफलाईन भी कार्य करेगी। उन्होंने सम्रग शिक्षा अभियान के अंतर्गत अध्यापकों और अभिभावकों के मध्य सीधा सम्पर्क स्थापित करने के लिए ई-सम्वाद मोबाईल ऐप का भी शुभारम्भ किया। यह सुविधा राज्य के 15 हजार विद्यालयों में उपलब्ध करवाई जाएगी। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने इस अवसर पर स्मार्टशाला किट जारी करते हुए कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को गुणवत्ता शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा कहा कि इस उद्देश्य के लिए टेक्नालजी का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में प्रदेश में लगभग 6 हजार प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती की जा चुकी है जिससे प्रदेश में सरकारी स्कूलों को सुदृढ़ बनाने में सहायता मिली है।

प्रधान सचिव शिक्षा के.के पंत ने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय प्रगति की है। सर्व शिक्षा अभियान (एस.एस.ए) के परियोजना निदेशक आशीष ने कहा कि राज्य सरकार और सम्पर्क फाउन्डेशन प्रदेश के सभी 10,661 सरकारी प्राथमिक पाठशालाओं में सम्पर्क स्मार्टशाला शुरू करेंगे जिससे राज्य के लगभग 3.2 लाख विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। सम्पर्क फाउन्डेशन के संस्थापक निदेशक विनीत नायर ने कहा कि वर्तमान में फाउन्डेशन देश के छः राज्य के 76 हजार विद्यालयों में सम्पर्क स्मार्ट शाला चला रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 के दौरान फाउन्डेशन ने सम्पर्क स्मार्ट शाला कार्यक्रम के लिए 55 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है। 

सम्पर्क स्मार्ट शाला की अध्यक्ष कुसुम महापात्रा ने कहा कि सम्पर्क फाउन्डेशन ने वर्ष 2020 तक देश में 650 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है जिससे दो लाख विद्यालयों में शिक्षा में व्यापक सुधार का अभियान चलाया जाएगा। इस कार्यक्रम से दो करोड़ से भी ज्यादा छात्रों को लाभ पहुंचाया जा सकेगा। निदेशक प्राथमिक शिक्षा रोहित जम्वाल ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा में लगभग 9 करोड़ रूपए कि लागत से निर्मित प्रशासनिक एवं विज्ञान खण्डों का शुभारम्भ किया। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत शर्मा व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।