सम्पर्क स्मार्ट शाला प्रोग्राम

हम शिक्षा में बदलाव ला रहे हैं :

समस्या की
पहचान करके

भारत के 10 लाख सरकारी विद्यालयों में 14 करोड़ 40 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा मिलने के बाद, विगत 19 सालों में शिक्षा के प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों के 96% नामांकन किया जा चुके हैं। हालांकि राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (एनएएस) सहित अन्य सभी स्वतंत्र सर्वेक्षणों में शिक्षा के ख़राब प्रतिफलों की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करते हुए बताया गया है कि कक्षा 5 के 10 में से करीब 6 विद्यार्थी कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाते हैं, वहीं 10 में से 8 विद्यार्थी सामान्य गणित के प्रश्न भी हल नहीं कर पाते हैं। इसके अतिरिक्त इन सभी सर्वेक्षणों द्वारा यह भी अनुमान लगाया गया है कि अब तक देश के 6-14 वर्ष की आयु समूह के 60 लाख बच्चों का विद्यालयों में नामांकन नहीं हो पाया है, वहीं विद्यालयों में दाखिला लेने वाले बच्चों में से 36%बच्चे अपनी प्राथमिक शिक्षा पूर्ण होने से पहले ही विद्यालय छोड़ देते हैं।

  • 6/10 बच्चे कक्षा
    स्तर की अंग्रेज़ी नहीं पढ़ पाते
  • 8/10 बच्चे गणित के
    साधारण सवाल हल नहीं कर पाते

भारतीय शैक्षिक व्यवस्था  में ऐसी कई जटिल समस्याएं हैं, जो अपेक्षित सीखने के प्रतिफलों को प्राप्त करने में बाधा बनती हैं। जैसे – अपर्याप्त रूप से योग्य और उदासीन शिक्षक, विद्यार्थियों की उच्च अनुपस्थिति दर, शिक्षण की दोषपूर्ण विधियां, बहु-कक्षा शिक्षण और ख़राब आधारभूत संरचना।

किसी भी देश का सामाजिक एवं आर्थिक विकास उस देश में विद्यार्थियों को मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करता है, इसलिए यदि समय रहते भारतीय शिक्षा के संकटों पर विचार नहीं किया गया और सीखने के प्रतिफलों में सुधार न लाया जा सका तो यह देश के जनसांख्यिकीय लाभांश को ही देश की सबसे बड़ी चुनौती में बदल देगा।

नवाचारों की
शुरूआत करके

सम्पर्क फाउंडेशन ने कई वर्षों के शोध के बाद सीखने के प्रतिफलों में सुधार लाने के लिए आधुनिक, अल्पव्ययी और उपभोक्ता केंद्रित योजना,सम्पर्क स्मार्ट शाला, का विकास किया है।हम सम्पर्क स्मार्ट शाला में शिक्षा गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले साधनों के खर्च को $ 1प्रति विद्यार्थी प्रति वर्ष रखने में सफल हुए हैं।

सम्पर्क
स्मार्ट शाला 
ने अपने 5 नवाचारों
के माध्यम से
कक्षा में शिक्षा के स्तर को
परिवर्तित कर दिया है

ध्वनि उपकरण जिसे दोबारा चार्ज किया जा सके – एक सूत्रधार ‘सम्पर्क दीदी’–जो ध्यानपूर्वक शोध करके बनाए गए अध्यायों, गीतों, संगीतों और खेलों को बच्चों को सुनाती हैं। पहली बार भाषा सीखने वाले बच्चों के लिए सुनने और बोलने की एक ऐसी प्रेरक विधि है, जिसमें भाषा सीखाने के लिए (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना) संपूर्ण भाषा पद्धति का प्रयोग किया गया है।

इन शिक्षण सामग्रियों को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में विद्यार्थियों को अंग्रेज़ी एवं गणितीय अवधारणाओं को समझाने में मदद करने के लिए बनाया गया हैं। 

यह खेल सात स्तरीय जटिलताओं के साथ इस तरह बनाए गए हैं कि यदि शिक्षक विद्यार्थियों के आस-पास न हो तब भी वे अवधारणाओं के सीखने में सक्षम हो सकें।

इस अभ्यास पुस्तिका के माध्यम से शिक्षक पाठ पढ़ाने के दौरान पुस्तिका में पाठ के अंत में दिए गए क्यूआर कोड को  स्कैन करके पाठ पर आधारित ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन वीडियो तक पहुंच सकते हैं।

एक परस्पर संवादात्मक मोबाइल ऐप जिसका उपयोग ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकता है। इस ऐप में ऐनिमेटेड वीडियो सहित कई तरह के खेल, पहेलियां एवं अभ्यास प्रश्न भी उपलब्ध कराए गए हैं। यह ऐप शिक्षणों को शिक्षण का नवीन एवं व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करती है।

1 | साउंड बॉक्स +

ध्वनि उपकरण जिसे दोबारा चार्ज किया जा सके – एक सूत्रधार ‘सम्पर्क दीदी’–जो ध्यानपूर्वक शोध करके बनाए गए अध्यायों, गीतों, संगीतों और खेलों को बच्चों को सुनाती हैं। पहली बार भाषा सीखने वाले बच्चों के लिए सुनने और बोलने की एक ऐसी प्रेरक विधि है, जिसमें भाषा सीखाने के लिए (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना) संपूर्ण भाषा पद्धति का प्रयोग किया गया है।

2 | 3 डी शिक्षण सीखने की सामग्री +
3 | बोर्ड गेम्स +
4 | मल्टीमीडिया अभ्यास पुस्तिका +
5 | संपर्क स्मार्ट शाल ऐप +

बड़े पैमाने पर
क्रियान्वयन

हमने अपनी योजनाओं का कार्यान्वयन "वाटरफॉल" मॉडल के आधार पर किया हैं, जिसमें एक विचार अथवा नवाचार सुव्यवस्थित रूप से बड़ी संख्या में लाभार्थियों तक पहुंचता है।

शिक्षा
पर प्रभाव

6 राज्यों के 76,000 स्कूलों के 7 लाख बच्चों तक सम्पर्क फाउंडेशन अपनी पहुँच बना चुका है | यही नहीं इन स्कूलों में सेवारत 2 लाख से भी अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करने में भी हमने सफलता हासिल की है |

जिन स्कूलों में सम्पर्क स्मार्टशाला प्रोग्राम को लागू किया गया है वहाँ उन बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिन्होंने गणित और अंग्रेजी में अपने कक्षा के स्तर के अनुरूप सवालों के जवाब दिए हैं | छत्तीसगढ़, झारखंड और हरियाणा में केवल एक वर्ष में बच्चों के प्रदर्शन में क्रमशः 39, 36 और 47 प्रतिशत  सुधार हुआ है |

  • शिक्षकों के कार्यभार में 30 प्रतिशत की कमी: हमने जिस तरह से शैक्षिक अवधारणाओं को समझाया है और संपूर्ण क्लासरूम प्रक्रिया को डिज़ाइन किया है , वह शिक्षक विद्यार्थी अंतरसंबंधों को सहज और तनावमुक्त बनाने में मदद करता है | 
  • 95 % शिक्षक हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में  शामिल होते हैं | इसलिए नहीं कि उन्हें ऐसा करने के लिए आदेश मिलता है बल्कि इसलिए कि वे हमारा प्रशिक्षण हासिल करने के लिए उत्सुक रहते हैं| सम्पर्क एक बहुत ही सहज, सरल और खुले परिवेश में अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करता है जहां शिक्षक ठीक वैसे ही माहौल में प्रशिक्षण हासिल करेते हैं  जैसे माहौल और परिवेश की  स्कूलों में बच्चों को जरुरत होती है |
  • 56 प्रतिशत शिक्षक ऐसे होते हैं जो दो वर्ष के अंदर प्रोग्राम को पूरी तरह अपना लेते हैं और इसका संचालन करने लगते हैं | इससे पता चलता है कि यह प्रोग्राम उनके लिए कितना गौरवपूर्ण है |