04 September 2019

अनोखी टीचर

By फ़ैज़ी अलीम

प्रतीक्षा मैडम कौलागढ़ स्कूल देहरादून में कक्षा 2 को पढ़ाती हैं l उनसे मेरी मुलाकात एक स्कूल विजिट के दौरान हुई |  प्रतीक्षा जी  कभी भी अपने बच्चों को मार्क्स लाने पर जोर नहीं देती, बल्कि बेसिक्स क्लियर करवाने पर धयान देती हैं | अपने स्कूल में भी  कक्षा 2 की यह टीचर काफी रूचपुर्वक  तरीके से बच्चों को पढ़ा रही है l सीक्वेंस को पूरी तरह फॉलो करते हुए यह गतिविधियों को काफी समय देती हैं व उसमें कुछ गेम्स ऐड करती हैंl किसी भी चीज को रुचि के तरीके से कैसे पढ़ाना है यह इन्हें भली-भांति आता हैl  

लिखवाते वक्त वह विभिन्न तरीके के  रंगो का इस्तेमाल करती हैं , बच्चों से शब्द बनवाने के लिए  पजल का गेम खेल लाती हैं l यही कारण है  कि इनकी क्लास के ज्यादातर बच्चे बेहतर पढ़ रहे हैंl पिछली बार जब मैं इनके स्कूल गया था तोह इनकी क्लास में पढ़ने वाले कुछ छात्र  संजू , रितिक जो कि बिल्कुल नए एडमिशन थे, उन्हें  वर्ण  बहुत मुश्किल लगता था |  इस विजिट के दौरान यह पाया गया कि बच्चे आगे आकर खुद शब्द पढ़ रहे थे lसबसे बड़ी बात बच्चों का आत्म विश्वास  बढ़  रहा है और जो नहीं पढ़ते थे या कतराते थे अब वह बच्चे भी आगे आकर पढ़ने के लिए उत्सुक दिखते हैं l टी एल एम  और  विभिन्न तरीके की एक्टिविटीज व गेम्स  के माध्यम से वह बच्चो को मुशिक पाठ आसानी से समझाती  हैं l सोहन जो पहले वर्ण तक नहीं पढ़ पा रहा था अब वह सेंटेंस पढ़ लेता है |  

प्रतीक्षा जी का मानना है कि खेल खेल में बच्चे ज्यादा समझतें हैं और याद रखतें हैं |  उन्होंने अपनी बेटी को भी ऐसे ही पढ़ाया है | जब उनकी बेटी कक्षा पांचवी में पड़ती थी , उन्होंने  उसे कक्षा ग्यारहवीं की किताब दे दी तो उसे भी  वह पढ़ने की कोशिश करती रही l उन्होंने  शुरू से ही बच्चों को शेक्सपियर  जैसे बड़े लेखकों के द्वारा लिखी गयी पुस्तके  पढ़ने के लिए दीं  | अपने बच्चों को जुनून के साथ पढ़ाया  और उनमें पढ़ने  का जुनून  जगाया  | 

मेरा मानना है कि यदि इसी प्रकार की शिक्षक व शिक्षिकाएं हर स्कूल में हर बच्चे को मिल जाए तो बच्चों का भविष्य सुनहरा हो जाएl क्योंकि पढ़ाना जुनून के साथ पढ़ाना ,यह केवल एक पेशा नहीं है बल्कि एक तपस्या है lबेहतर भविष्य के निर्माण में एक शिक्षक का बहुत बड़ा महत्व होता है lयदि शिक्षक हमें बचपन से अच्छा मिल जाए व हमारे बेसिक्स क्लियर हो जाए तो आने वाली कक्षाओं में बच्चा और बेहतर ढंग से करने लगता है और फिर इसी तरह स्कूल से जब वह कॉलेज में आता है वह अपनी मुश्किल को खुद ही हल करने में सक्षम हो जाता है l एक शिक्षक का हमारी जिंदगी पर बहुत बड़ा बहुत अहम भूमिका होती है यदि शिक्षक प्रतीक्षा पुंडीर जैसा हो तो यक़ीनन बच्चे का भविष्य सुनहरा है वह आगे चलकर बहुत कुछ कर सकता है|

 

(लेखक सम्पर्क में डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजर हैं | यह विचार उनके अपने हैं | )