26 September 2019

ताकि बचे रहें सपने…

By स्पार्क अन्विति सिंह

पाश को उनके क्रांतिकारी  विचारों के लिए जाना जाता है, जिनकी कम उम्र में ही अलगाववादियों ने  हत्या कर दी  थी|  पाश  (अवतार सिंह संधू) भगत सिंह की विचारधारा में विश्वास करते थे। उनका मानना था कि सबसे खतरनाक होता है 'हमारे सपनों का मर जाना’ | 

 मनुष्य  की कल्पना, आशा और आकांक्षाएं उसके सपनों को ईंधन देने का काम  करती हैं। अनादि काल से मानव जाति स्वप्न देखती आ  रही है | पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की खोज, असंख्य आविष्कार जैसे हवाई जहाज, रेल, अंतरिक्ष यान, इत्यादि; मंगल ग्रह पर पानी की खोज तथा चाँद पर उसके कदम उसके सपने देखने  और उसे पूरा करने की क्षमता की गवाही देते है।

पाश  के डर के परिप्रेक्ष्य में उस दिन की कल्पना करें जब हम सभी सपने देखना बंद कर देंगे ? तब क्या होगा? क्या हम सभी रोबोट की भांति यंत्रवत, जीवन की जरूरतों को पूरा करने वाले मशीन मात्र बनकर नहीं रह जाएंगे? ऐसे में  क्या हमें अपनी अगली पीढ़ी के सपनों, आशाओं और आकांक्षाओं पर विचार नहीं करना चाहिए? क्या हमारे लिए यह समझना जरुरी नहीं कि वे सपने देख रहे या नहीं? क्या हम उन्हें सपने देखने भी दे रहे हैं? सीखने  के संकट के इस युग में, बच्चों को सीखने, सोचने और सपने देखने के लिए पर्याप्त स्थान, समय और संसाधन उपलब्ध कराने में शिक्षा की कोई  भूमिका है भी या नहीं ? और सपने भी कौन से? गरीबी और भूख को कम करने का सपना? शांति और समृद्धि को बनाए रखने का  सपना?

तदनुसार, शिक्षा का निर्माण सपनों की नींव पर किया गया है। वे सपने हैं, अवसरों की समानता और सामजिक समता स्थापित करने का सपना,  सामाजिक और  वैयक्तिक विकास का सपना,  सार्वभौमिक मूल्यों के विकास और हमारी अगली पीढ़ी में  वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास का सपना? क्या हम इन सपनों को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रयास कर रहे हैं? क्या हमारे शिक्षक छात्रों को सही मार्ग पर ले जाने और उन्हें इन सपनों को पूरा  करने  के लिए उचित मार्ग दर्शन देने के लिए इच्छुक हैं ?  बच्चों में  कल्पनाशीलता  और विचारशीलता का होना जरुरी है | क्या छात्रों को स्कूलों में कल्पना करने, सोचने और सवाल करने के लिए पर्याप्त गुंजाइश दी जा रही  है?

निश्चित रूप से  उत्तर की तुलना में  प्रश्न  अधिक  हैं। लेकिन एक बात स्पष्ट है, ऐसे परिदृश्य में शिक्षक की भूमिका एक माली की तरह उभरती है, जो पानी, खाद, मिट्टी और प्रकाश के रूप में एक अंकुर को सभी पूरक सुविधाएं मुहैया कराता है ताकि यह उचित रूप से बड़ा हो सके एक सुंदर पेड़ बने ।

यह समझा जाना चाहिए कि  विद्यार्थी भी  अंकुर जैसे होते हैं, जिनमें अन्तर्निहित क्षमताएं और गुण होते  हैं| शिक्षक का कार्य उन अन्तर्निहित क्षमताओं और गुणों की पहचान करके उन्हें विकसित होने के लिए परिवेश देना है | 

जैसा कि विवेकानंद ने कहा कहा  है, 'शिक्षा मनुष्य में अन्तर्निहित  पूर्णता की अभिव्यक्ति मात्र है | "इस परिप्रेक्ष्य में शिक्षक की भूमिका एक ऐसे व्यक्ति के रूप में उभरती है, जो अपने विद्यार्थियों के साथ ज्ञान का सह-निर्माण करता है और इसके बारे में उनकी समझ बढ़ाता है। वह गंभीर रूप से सोचने, प्रभावी ढंग से संवाद करने, सहयोग करने और अपने कल्पनाशीलता और अपनी क्षमताओं को विकसित करने में छात्रों की मदद करने के लिए जिम्मेदार है।

शिक्षक की पाठ योजना  में  प्रत्येक बच्चे की जरुरत  को जानने  और उन्हें  पूरा करने की  गुंजाईश  अवश्य होनी  चाहिए। इसके अलावा, उन्हें अपनी कक्षा की प्रक्रियाओं को इस तरह से डिजाइन करना चाहिए कि बच्चों को आत्माभिव्यक्ति के भरपूर अवसर मिले | 

एक विचार पूर्ण, तर्कसंगत दिमाग ही शांति और समृद्धि का  सपना देख सकता है। शिक्षक की भूमिका छात्रों को मानव जाति  के कल्याण के सपने देखने और एक खुशहाल और समृद्ध राष्ट्र का मार्ग प्रशस्त करने के लिए प्रेरित करना है। तो आइए हम मिलकर काम करें और पाश के 'सपनों के मर जाने के भय' को  दूर करने का प्रयास करें | हम प्रतिज्ञा करें की हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे |