09 October 2019

शिक्षा ने मेरे जीवन को नयी दिशा दी है

भुवनेश कुमार स्कूल के बच्चों के साथ
By स्पार्क भुवनेश कुमार

मेरा जन्म कांगड़ा जिले के मशहूर शहर पालमपुर के नजदीक एक छोटे से गांव में हुआ था ।  बचपन में ही एक दुर्घटना में मैने अपने पिता को खो दिया, जिसकी वजह से घर की सारी जिम्मेदारी मेरी माँ  के कंधों पर आ गई।

उस वक़्त मैं बहुत छोटा था, समय की गंभीरता की समझ मुझमें नहीं थी।  पर जैसे जैसे बड़ा होता गया, वक़्त की नज़ाकत को समझने लगा और हर काम में  माँ का हाथ बटाने लगा।  इतना सब होने के बावजूद  माँ ने मेरी शिक्षा पर पूरा जोर दिया | समय के साथ चलते चलते आँगनवाड़ी  जाने वाला मैं, विश्व विद्यालय जाने लगा ।

आर्थिक तंगी की वजह से मुझ में आत्म-विश्वास की कमी थी, लोग भी उसका काफी फायदा उठाते और साथ ही साथ डराते भी थे और वही डर मेरे अंदर बैठ गया था । जिस कारण मैं सबसे  बहुत कम बात किया करता था , यहाँ तक की अपने घर वालों से भी | लेकिन जब मैं विश्वविद्यालय से  समाज कार्य में उच्च स्नातकोत्तर में अपनी शिक्षा ग्रहण करने लगा तो उस समय लोगों के बीच जाने का अवसर मिला।  धीरे-धीरे मेरे अंदर आत्मविश्वास आया और लोगों को समझने में मदद भी मिली। इन सबकी वजह से जो डर मेरे अंदर था वो भी  धीरे धीरे ख़तम होने लगा था ।

शिक्षा मुझे नया विश्वास दे रही थी, और सहारा भी | उसी सहारे के साथ चलते चलते मैं निडर और साहसी बन गया | अपने साथ साथ दूसरो की समस्याएँ  भी हल करने की कोशिश करने लगा | शिक्षा ने जीवन की उलझनों से बाहर आने का अच्छा रास्ता भी बनाना सिखाया ।

शिक्षा मुझे नया विश्वास दे रही थी, और सहारा भी | उसी सहारे के साथ चलते चलते मैं निडर और साहसी बन गया | अपने साथ साथ दूसरो की समस्याएँ  भी हल करने की कोशिश करने लगा | शिक्षा ने जीवन की उलझनों से बाहर आने का अच्छा रास्ता भी बनाना सिखाया ।

मैने सामाजिक कार्य में ही अपनी शिक्षा को आगे लेकर जाना उचित समझा । मुझे लोगों के साथ मिल कर सामाजिक बदलाव लाना अच्छा लगता है | आज मैं सशक्त हूँ तो केवल अपनी शिक्षा की वजह से | मैं खुद भी आगे बढ़ना चाहता हूँ और अपने साथ मुझ जैसे दूसरों की भी मदद करना चाहता हूँ |

शिक्षा ने मेरे जीवन को नयी दिशा दी है और मुझे आगे बढ़ते रहने का आत्म बल |