09 January 2020

शिक्षा में सकरात्मकता की शक्ति

By श्रीनिवास भावाराजु

मैं छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर भिलाई से हूं।  भिलाई पूरी दुनिया में अपने इस्पात संयंत्र के लिए मशहूर हैं।  यहां लोग काम करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं, उनकी अलग–अलग भाषाएं हैं अलग-अलग संस्कृतियां है बावजूद इसके सभी बिना किसी भेद-भाव के बड़े प्यार से मिलजुल एक साथ रहते हैं। भिलाई में रहते हुए मुझे ऐसा लगता था कि कहीं कोई परेशानी नहीं है...जिन्दगी बहुत अच्छी है और चारो ओर संपन्नता और खुशियां ही खुशियां है, लेकिन जिसे मैं सच मान बैठा था सिर्फ वही सच नहीं था... सम्पर्क  फाउंडेशन के साथ जुड़कर लोगों की जिंदगी को करीब से देखने का मौका मिला। इस दौरान मुझे कई छोटी-बड़ी यात्रायें करनी पड़ी ताकि मैं छत्तीसगढ़ के एक-एक प्राथमिक स्कूल, वहां पढ़ने वाले बच्चे, उनकी परिस्थितियाँ, अध्यापको को जान सकूं।  इन यात्राओं के दौरान मुझे पहली बार जीवन की कड़वी सच्चाई का अनुभव हुआ।  मैं इन इलाकों में रहने वाले लोगों की जिन्दगी के दुखद पहलूओं को करीब से जान पाया। 

नक्सल प्रभावित इलाकों- खासकर सुकमा,बीजापुर,बस्तर और नारायणपुर- की यात्रा ने तो मेरी आंखें ही खोल दी। अपने इस पड़ाव में अब हमें जग्दलपुर से सुकमा की यात्रा करनी थी, लिहाजा मैने जग्दलपुर से सुकमा तक ले जाने वहां के स्थानीय ड्राइवर को चुना जो इस इलाके के चप्पे-चप्पे से वाकिफ़ था।   

हम जग्दलपुर से सुकमा की ओर चल दिए , जग्दलपुर से सुकमा तक का सफर महज़ दो घंटों का था लेकिन ये छोटी सी यात्रा मेरी जिंदगी की सबसे लम्बी यात्रा प्रतीत हो रही थी। जग्दलपुर से सुकमा जाने का रास्ता आसान नही था। टेढे-मेढे वीरान रास्तों पर दूर दूर तक कहीं कोई दिखाई नही दे रहा था, अगर दिख रहे थे तोह बस घने वीरान जंगल।  इन घने जंगलों से गुजरते हुए हमें रास्ते में जले हुए वाहनों के अवषेश दिखाई दिए। ड्राइवर से पूछने पर पता चला कि इस पूरे क्षेत्र में नक्सलियों का बोलबाला है, उन्होंने ने ही इन वाहनों को जलाकर राख कर दिया हैं। 

जैसे जैसे हम आगे बढे हमें रास्ते में कई सीआरपीएफ कैंप दिखाई दिए, हमें कई चेकपेप्वाईंट्स पर चेकिंग के लिए रुकना पड़ा। पर दो ऐसी भी जगहें थी जहां स्थानीय नागरिकों ने हमारा रास्ता रोका। ड्राइवर ने बताया कि ये नक्सली हैं हर आने-जाने वाली गाडियों पर इनकी पैनी नजर रहती है। 

एक तो इतना वीरान घने जंगलों से घिरा रास्ता, उपर से पूरे रास्ते के दौरान ड्राइवर मुझे इस क्षेत्र के लोगों के साथ घटने वाली निर्मम और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की दिल दहला देने वाली कहानियां सुनाता रहा। जिन्हें सुनकर मेरे दिल की धड़कनें इतनी तेज हो गयीं कि मैं अपनी एक एक धड़कन सुन सकता था। और मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था कि बस सही-सलामत अपने गंतव्य स्थल तक पंहुच जाऊं। 

जब  हम गांव की ही परिधि में स्थित एक छोटे से स्कूल में पहुंचे, मैंने देखा कि  यहां के कमरो में अंधेरा था , लेकिन बच्चों और टीचर्स के दिलों में पढ़ने-पढाने का जोश और ज़ज्बा और उम्मीद की रौशनी थी। स्कूल प्रांगण में दाखिल होते ही टीचर्स और बच्चों ने गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया। उनकी निश्छल मुस्कान ने मेरे मन को उत्साह से भर दिया था। 

जब मैंने ये बताया कि मैं सम्पर्क फाउंडेशन से हूं, टीचर्स और बच्चों की खुशी देखते ही बनती थी।  संपर्क द्वारा दी गयी नीले रंग की गणित की किट बच्चों को काफी पसंद आई थी , रंग बिरंगे खिलौनो जैसे टीचिंग-लर्निंग मटेरियल (टी एल एम ) से सीखना और पढ़ना  उनके लिए काफी उत्साहवर्धक था।  टीचर्स भी संपर्क के इस अनोखे लर्निंग इनोवेशन की खूब तारीफ की और बताया कि इससे बच्चों को गणित सीखाना कितना आसान है।  संपर्क की तरफ से दी गयी इस टूल के लिए उन्होंने संपर्क के प्रति अपना आभार वयक्त किया। 

अब वक्त हो गया था यहां से निकलकर किसी और यात्रा पर जाने का टीचर्स और छात्रों से विदा ले कर मैं निकल ही था कि 10 साल की एक लड़की कमरे की तरफ दौड़ी चली आ रही थी। मैंने उससे उसका नाम और देर से आने का कारण पूछा तो उसने शर्माते हुए उसने अपना नाम गौरी बताया और कहा यहां आने के पहले उसे घर के कई काम करने पड़ते हैं क्योंकि उसके माता-पिता सुबह जल्दी काम पर निकल जाते हैं। लेकिन विपरीत परिस्थितियों के  बावजूद गौरी पढ़ाई को लेकर प्रतिबद्ध थी, गौरी को और सभी बच्चों को देखकर मैंने महसूस किया कि इन सुदूर और ग्रामीण इलाको के बच्चे अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने गरीबी और अझानता के पंजे से निकलने के लिए कठिन प्रयास कर रहे हैं। यहां आकर मुझे ये समझ में आया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों अगर आप ढृढ़ संकल्पित हैं और पढाई-लिखाई को लेकर सकारात्मक हैं कुछ भी संभव है। और शायद यही वजह थी कि यात्रा के इतने दिन बाद भी इन बच्चों की सकारात्मकता आज भी हमारे साथ बनी हुई हैI


(लेखक सम्पर्क फाउंडेशन में बतौर स्टेट ऑपरेशन हेड कार्यरत हैं।  विचार उनके अपने हैं।)