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फ़ोन से बांधे रखी है शिक्षा की डोर

31 July, 2020
प्रियंका

शिक्षक शिक्षा के सारथी होते हैं। पिछले 5 महीने हमारे लिए एक परीक्षा के सामान रहें हैं। कोरोना महामारी के समय में, विद्यालय बंद होने के बावजूद भी हमे बच्चों की पढ़ाई जारी रखनी थी। ये बात तो लगभग सभी जानते हैं कि सरकारी विद्यालयों के ज्यादातर बच्चे गरीब वर्ग से आते हैं, और उनके पास मोबाइल और लैपटॉप जैसी सुविधाएँ नहीं होती हैं। इसलिए ऑनलाइन शिक्षा पद्दति से उनकी शिक्षा को...

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ऑनलाइन शिक्षा पद्दति का आधार हैं अभिवावक...

09 July, 2020
यतिका पुंडीर

आज समूचा विश्व कोरोना महामारी की चपेट में है। दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी लॉकडाउन जैसे हालातों से जूझ रही है।इसके चलते सामाजिक, औद्योगिक और आर्थिक संकट गहराने के पूरे आसार हैं तो, वहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी तो इस मुसीबत ने कब्ज़ा कर रखा था। ऐसे में हम शिक्षकों ने कुछ खास प्रयास किये और ज़ोर डाला ऑनलाइन शिक्षा पर ताकि इस लॉकडाउन की परिस्थिति में भी सरकारी स्कूल के बच्चों को...

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पीढ़ियों के अंतर से शिक्षा पर प्रभाव

09 June, 2020
समृद्धि साक्षी

शिक्षा...मेरा मानना है कि यह सिर्फ एक शब्द मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे भविष्य और अगली पीढ़ी की एक मूल-भुत आवश्यकता है और इसी आवश्यकता को समझने के लिए मैंने अपने पिछले 2 वर्ष गुजरात राज्य के  खेड़ा जिले के सरकारी विद्यालयों में  व्यतीत किये । जहाँ मुझे  सरकारी स्कूल के शिक्षकों के साथ काम करने का अनुभव मिला ।
 
इन शिक्षकों में कुछ ऐसे शिक्षक भी थे, जो अगले 4-5 साल में...

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पीयर-टू-पीयर लर्निंग पढ़ाने का एक प्रभावी साधन है: निधि जैन

13 February, 2020
निधि जैन

बचपन में मुझे स्कूल जाना बहुत अच्छा लगता था।  मेरे अध्यापक बहुत अच्छे थे, वे बहुत प्यार से पढ़ाते थे , खेलने - कूदने के लिए प्रोत्साहित करते और जीवन के कई पहलुओं पर प्रेरणा देते थे।  स्कूल मानो घर जैसा ही था , हमने वहां बहुत सीखा।  

उनके व्यवहार का मुझ पर इतना प्रभाव हुआ कि मैं बिलकुल उन जैसी बनना चाहती थी। मैंने तय कर लिया था कि मैं बड़े होकर टीचर ही बनूंगी।  

आज मुझे...

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शहर और गाँव के बच्चों की मानसिक क्षमताओं में कोई अंतर नहीं है: ममता मिश्रा

11 February, 2020
सम्पर्क फाउंडेशन

ममता मिश्रा, उत्तर प्रदेश के चाका ब्लॉक के एक प्राथमिक विधालय की अध्यापिका हैं।  इनका मानना है कि बच्चो को पढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका होता है उन्हें खेल - खेल में पढ़ाना।  ममता ने अपने नवाचारों की मदद से इनके स्कूल में पढ़ने वाले बच्चो के सीखने के प्रतिफलों में काफी सुधार  लायी हैं।  पिछले कुछ वर्षो से यह अपने नवाचारों और क्लासरूम एक्टिविटीज को यूट्यूब अवं...

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शिक्षा और पारस्परिक सहयोग की सफल कहानी

05 February, 2020
श्री सुधीश कुमार

2013 में किए गए नेशनल अचीवमेंट सर्वे के दौरान छत्तीसगढ़ के नतीजे चौका देने वाले थे। ये सर्वे देश भर में किए गए थे जिसमें छत्तीसगढ़ के स्कूली बच्चों में सीखने की क्षमता सबसे कम पाई गयी।  यहाँ 10 में से 6 बच्चे ऐसे थे जो ठीक से सामान्य पाठ भी पढने में भी सक्षम नही थे और न ही गणित के सरल सवाल हल कर सकते थे|

सर्वे में आए परिणाम से ये तो समझ में आ ही गया था बच्चों की नींव ही कमजोर थी और उन्हें...

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और इस तरह से मैनें पाई गणित पर जीत

28 January, 2020
दुर्गा प्रसाद यादव

हर बार मेरे शिक्षक जब मुझे ब्लैक बोर्ड पर गणित के सवाल हल करने को कहा करते थे , मुझे घबराहट होने लगती थी। वैसे तो मैं ज्यादातर विषयों में अच्छा था, लेकिन गणित का नाम सुनते ही मेरे पसीने छूट जाते थे। 
इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं थी कि मेरे गणित के अध्यापक मुझे सबसे ज्यादा निराशा जनक और कमजोर छात्र कहकर कोसते रहते थे। गणित में कमजोर होने के कारण मेरे सहपाठी भी मेरा मजाक उड़ाया...

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शिक्षा में सकरात्मकता की शक्ति

09 January, 2020
श्रीनिवास भावाराजु

मैं छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर भिलाई से हूं।  भिलाई पूरी दुनिया में अपने इस्पात संयंत्र के लिए मशहूर हैं।  यहां लोग काम करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं, उनकी अलग–अलग भाषाएं हैं अलग-अलग संस्कृतियां है बावजूद इसके सभी बिना किसी भेद-भाव के बड़े प्यार से मिलजुल एक साथ रहते हैं। भिलाई में रहते हुए मुझे ऐसा लगता था कि कहीं कोई परेशानी नहीं है...जिन्दगी बहुत अच्छी है और...

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शिक्षकों का उत्साह

13 December, 2019
रंजीत कुमार

मैं सोशल सेक्टर में १५ वर्षो से काम कर रहा हूँ और मैंने हिंदुस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों  को बहुत करीब से देखा है।  तीन साल पहले जब मैं संपर्क से जुड़ा तोह मेरा पूरा रुझान शिक्षा की तरफ हो गया। मेंने शिक्षा के स्तर को प्रभावित करने वाली सारी समस्याओं पर  काफी अध्यन किया । हमारे देश में बहुत से कारणो की वजह से शिक्षा प्रभावित होती है--ख़राब शिक्षा शास्त्र, स्कूलों में शिक्षक का न...

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मेरी माँ

14 November, 2019
स्पार्क प्रियंका

हमारे बडे बुजुर्ग कहते है की इस दुनिया में माँ से महान कोई नहीं है क्यूंकि  माँ हमें जन्म देती है और पाल-पोसकर बड़ा  करती है और अपने पैरो पर खडा होने के काबिल बनाती है जिससे हम सही गलत की पहचान कर सकें। हमारे शिक्षक कहते थे कि माँ हमारी पहली अध्यापिका होती है जो हमें जन्म से ही शिक्षा देती है।

ऐसे ही मेरी माँ है। मेरी माँ मेरे लिए इस दुनिया की सबसे अच्छी माँ है। लोग कहते है न इस...

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शिक्षा ने मेरे जीवन को नयी दिशा दी है

09 October, 2019
स्पार्क भुवनेश कुमार

मेरा जन्म कांगड़ा जिले के मशहूर शहर पालमपुर के नजदीक एक छोटे से गांव में हुआ था ।  बचपन में ही एक दुर्घटना में मैने अपने पिता को खो दिया, जिसकी वजह से घर की सारी जिम्मेदारी मेरी माँ  के कंधों पर आ गई।

उस वक़्त मैं बहुत छोटा था, समय की गंभीरता की समझ मुझमें नहीं थी।  पर जैसे जैसे बड़ा होता गया, वक़्त की नज़ाकत को समझने लगा और हर काम में  माँ का हाथ बटाने लगा।  इतना सब होने के...

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शिक्षक जो बनाए स्कूल की दुनिया मजेदार

04 October, 2019
स्पार्क सुदर्शन धिरटा

पढ़ाई में दिलचस्पी होते हुए भी बचपन में मुझे स्कूल जाना कभी पसंद नहीं था | मेरे माता पिता चाहते थे कि मैं शिक्षा ग्रहण करूँ और इसके लिए वे हरसंभव मेरी मदद करते रहे | फिर भी स्कूल जाना मेरे लिए किसी यंत्रणा से कम नहीं था | 

वर्तमान में मैं शिक्षा के क्षेत्र में ही सक्रिय हूँ | ज़ाहिर है मुझे स्कूलों का दौरा करने और शिक्षकों से मिलने के अनगिनत अवसर मिलते रहते हैं | इस दौरान मुझे बहुत से...

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लड़कियों को क्यों पढ़ना चाहिए?

04 October, 2019
स्पार्क प्रियंका

आज के इस दौर में शिक्षा अर्थात एजुकेशन यदि किसी व्यक्ति के अंदर विराजमान है तो वह व्यक्ति महान व्यक्ति बन सकता है। महान व्यक्ति के अंदर अच्छी इनसानियत, उच्च विचार आदि को शामिल किया जा सकता है, जिससे वह महान व्यक्ति कहलाता है। आज के युवा पीढ़ी में लडकियां यानी नारी जाति की शिक्षा को अवश्य ध्यान में रखना चाहिए। नारी को शिक्षित होने से हमारा देश तरक्की के रास्ते पर होगा, क्योंकि कहा...

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शिक्षा ही मेरा मज़हब

30 September, 2019
स्पार्क फ़ैज़ी अलीम

मेरा जन्म 1988 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के मुस्लिम परिवार में हुआ। हम जॉइंट फैमिली में रहा करते थे और हमारे खानदान के सारे लोग  रूढ़ीवादी सोच के थे। शिक्षा का अभाव था और उस दौरान मेरठ शहर में हिंदू मुस्लिम के बीच सांप्रदायिक तनाव  अपने चरम पर  था | आए दिन कर्फ्यू लगते रहते थे । नौबत यहां तक आ जाती थी कि  हेलीकॉप्टर द्वारा खाना फेंका  जाता था ।

मैं बहुत छोटा था और डब्बे का...

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ताकि बचे रहें सपने…

26 September, 2019
स्पार्क अन्विति सिंह

पाश को उनके क्रांतिकारी  विचारों के लिए जाना जाता है, जिनकी कम उम्र में ही अलगाववादियों ने  हत्या कर दी  थी|  पाश  (अवतार सिंह संधू) भगत सिंह की विचारधारा में विश्वास करते थे। उनका मानना था कि सबसे खतरनाक होता है 'हमारे सपनों का मर जाना’ | 

 मनुष्य  की कल्पना, आशा और आकांक्षाएं उसके सपनों को ईंधन देने का काम  करती हैं। अनादि काल से मानव जाति स्वप्न देखती आ  रही है |...

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एक संघर्ष यह भी

23 September, 2019
स्पार्क सुखविंदर कौर

मेरा जन्म हिमाचल प्रदेश के सोलन के पास एक छोटे से शहर स्वारघाट में हुआ था | मेरे माता पिता मुझसे बेहद प्यार करते थे और मैं उनसे| मुझे स्कूल जाना और उसके परिसर में खेलना बहुत पसंद था | अगर कुछ नहीं अच्छा लगता था तो वह था गृहकार्य जो अन्य  बच्चों की तरह मुझे भी हर रोज  मिलता था | उस वक्त मैं उन समस्त सामाजिक भेदभावों के प्रति अनभिज्ञ थी जिनका सामना हमारे समाज की लड़कियों को आज भी करना...

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मेक इन इंडिया और कौशलपरक शिक्षा

20 September, 2019
अन्विति सिंह

मेक इन इंडिया के इस दौर में जब स्किल इंडिया का नारा जोर शोर से लगाया जा रहा है और सरकार भी उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, क्या हमारी स्कूली शिक्षा इसके लिए जरूरी कौशलों, क्षमताओं, और दक्षताओ को बच्चों में विकसित करने पर जोर दे रही है? रोजगारोन्मुख और भविष्योन्मुख शिक्षा ही वर्तमान समय की जरूरत है।

रोजगारोन्मुख शिक्षा से तात्पर्य ऐसी शिक्षा से है जो ना सिर्फ रोजगार...

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वो आठ साल

12 September, 2019
अन्विति सिंह

स्कूली शिक्षा के पायदानों में प्रारंभिक शिक्षा, जिसके अंतर्गत कक्षा एक से लेकर कक्षा आठवीं तक की विद्यालयी शिक्षा आती है , एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण पायदान है | यही वजह है की केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकारें , बच्चों को इस दौरान  मूलभूत सुवधाएं देने की हरसंभव कोशिश कर रही हैं  | शिक्षक, कक्षा, किताबों के साथ ही साथ  पोषण ,(मिड डे मील ),  यूनिफार्म और विभिन्न प्रकार के वजीफे दने की...

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अनोखी टीचर

04 September, 2019
फ़ैज़ी अलीम

प्रतीक्षा मैडम कौलागढ़ स्कूल देहरादून में कक्षा 2 को पढ़ाती हैं l उनसे मेरी मुलाकात एक स्कूल विजिट के दौरान हुई |  प्रतीक्षा जी  कभी भी अपने बच्चों को मार्क्स लाने पर जोर नहीं देती, बल्कि बेसिक्स क्लियर करवाने पर धयान देती हैं | अपने स्कूल में भी  कक्षा 2 की यह टीचर काफी रूचपुर्वक  तरीके से बच्चों को पढ़ा रही है l सीक्वेंस को पूरी तरह फॉलो करते हुए यह गतिविधियों को काफी समय देती...

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शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है

09 August, 2019
शैलेश परसाई

शिक्षा सीखने की एक प्रक्रिया है। यह किसी भी वस्तु या परिस्थिति को आसानी से समझने, किसी भी तरह की समस्या से निपटने और पूरे जीवन भर विभिन्न आयामों में संतुलन बनाए रखने में हमारी सहायता करती है। शिक्षा सभी मनुष्यों का सबसे पहला और सबसे आवश्यक अधिकार है। शिक्षा हमें अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। यह हमारे ज्ञान, कुशलता, आत्मविश्वास और...

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